यह 3औषधियां अश्वगंधा ,सफेद मूसली और कोंच के बीज क्यों है ताकत का खजाना ?

क्यों है? सभी लोग इन औषधियों से अनजान।

दोस्तों आज का आर्टिकल बहुत ही शानदार है क्यूंकि आज के आर्टिकल में ऐसा ज्ञान मिलने वाला है जिसे कोई नहीं जानता और सभी लोग इन जानकारी से अनभिज्ञ है तो देरी किस बात की चलो शुरू करते हैं।

दोस्तों अगर आप आपने शरीर को ताकतवर या पुष्ट करना चाहते और बेहतर करना चाहते है तो आपको अपने डाइट को अच्छा रखना होगा। आहार को अच्छा रखना होगा तो शरीर पर उसका प्रभाव होगा उसके के साथ-साथ कुछ ऐसी औषधियां भी है जो कि आपके शरीर को पुष्ट करने में बल वर्धन या ताकत को बढ़ाने , मांसपेशियों को विकसित करने में पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन लेवल को बढ़ाने में यौन दुर्बलताओं को समाप्त करने में बहुत ही सहायक होता हैं।

यह औषधीय विख्यात है आपने उनके विषय में सुना होगा और शायद प्रयोग भी किया हो यह औषधीय है सफेद मूसली और अश्वगंधा लेकिन यह समझ लेना भी उतना ही आवश्यक है कि इनको कितनी मात्रा में प्रयोग करना है कब-कब प्रयोग करना है इनका अनुपात क्या होना चाहिए।

समान मात्रा में लेना है या विषम मात्रा में लेना है यह समय के अनुसार गर्मी का जैसे मौसम है तो इस मौसम में क्या अनुपात होगा आपके शरीर में गर्मी भी ना बढ़े और इससे जो लाभ है वह भी आपको पूरा मिले।

अगर हम इन औषधीय का प्रयोग करते हैं तो शरीर में गर्मी बढ़ती है आप अगर आज के मार्गदर्शन को समझ लेंगे तो ऐसी स्थिति नहीं बनेगी आपके लिए पूरी तरह से आपका शरीर अनुकूल रहेगा।

यह औषधीय अपना काम शरीर में कैसी करती हैं ?

आयुर्वेद के अंतर्गत कहा गया है “धातु साम्य क्रिया चोक्ता तंत्र स्यास्य परयोजनम ”

यानी कि जो आयुर्वेद है उसका प्रयोजन उद्देश्य क्या है कि आपका धातुओं में संतुलन होना चाइये अब आप समझे एक इतना बड़ा शस्त्र है इतना विस्तृत है और उसका उद्देश्य क्या बता दिया की धातु संतुलित रहे यही उद्देश्य है।

यानी कि अगर आपके मेद , रक्त , रस , मज्जा , अस्थि , शुक्र यह 7 धातु संतुलित रहते हैं तो आपके शरीर में कोई बीमारी नहीं होगी आप स्वस्थ रहेंगे शरीर में बल रहेगा किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं होगी ऊर्जावान रहेंगे।

लेकिन धातुओं का संतुलन रहना आवश्यक है यहां पर आप बारीकी से अब यह विषय समझे कि जो शुरुआत के 6 धातु होते हैं वह आपके शरीर के ऊपर आधारित है यानी कि आप अच्छा आहार लेते हैं अच्छी टाइट लेते हैं तो शुरुआत के 6 धातु आपके बेहतर रहेंगे पुष्ट होंगे लेकिन कहा गया है कि जो अंतिम धातु होता है वीर्य धातु शुक्र धातु है यह धातु आपके मन से संबंधित होता है।

विद्वानों ने तो कहा है कि यह मनोवाह नाड़ी से संबंधित होता है यानी कि अगर आप गलत चिंतन करना शुरू कर देते हैं तो जो अंतिम धातु है उसका अधोगमन होना शुरू हो जाता है और उसका क्षय होना शुरू हो जाता है और वीर्य क्षय की स्थिति बन जाती है और इस स्थिति के कारण अनेक रोग आयुर्वेद के अंतर्गत बताए गए हैं जो कि शरीर में हो सकते हैं तो यहां पर ध्यान देने की आवश्यकता यह है की सबसे पहले तो विचारों को ठीक करना होगा।

अगर अंतिम धातु को पुष्ट करना है और अगर अंतिम धातु पुष्ट है तो उसका प्रभाव दूसरे पीछे के धातुओं पर भी पड़ता है और अगर आपका शुक्र धातु ठीक से नहीं है उसकी कमी पढ़नी शुरू हो जाती है तो मास , मेद , अस्थि आदि धातु भी प्रभावित होते हैं इसीलिए जो हमारे नवयुवक अत्यधिक गलत क्रियाएं करते हैं उनके शरीर से मांसपेशियां समाप्त होने लगती है.

बल या ताकत समाप्त होना शुरू हो जाता है शरीर में मेद धातु फैट बढ़ता शुरू हो जाता है शरीर थुलथुला हो जाता है कई बार वह व्यक्ति मोटा दिखाई देगा लेकिन मोटा दिखाई देना कोई अच्छी बात नहीं है शरीर में बल हो ऊर्जा हो मांसपेशियां हो एक सही स्थिति होनी चाहिए सुडौल स्थिति होनी चाहिए शरीर की यह आवश्यक है यह कब होगा जब अंतिम धातु का रक्षण होगा और उसे पुष्ट किया जायेगा की अब हमने इतना समझ लिया कि यह किस तरीके से प्रभावित करते हैं।

जादुई औषधियों की पूरी जानकारी।

अब हम आगे बढ़ते हैं और अपनी औषधीय को समझते हैं कि यह औषधीय इस धातु को पुष्ट किस प्रकार करते हैं इनका स्वभाव क्या है प्रकृति क्या है मात्र क्या होनी चाहिए।

दोस्तों सबसे पहले हम बात करेंगे सफ़ेद मूसली के बारे में –

सफ़ेद मूसली

अधिकतर हमारे भाई बधु समझते हैं कि सफेद मूसली जो है स्वभाव में गर्म होती है कहीं व्यक्ति कहते हैं कि हम इन चीजों का प्रयोग करते है तो हमें स्वप्न दोष आदि समस्या शुरू हो जाती है नाईट फॉल होना शुरू हो जाता है अब इसे कैसे बचाना है।

इसको समझे सबसे पहली बात क्या हुई कि सफेद मूसली स्वभाव में ठंडी है यह रक्त में बड़ी हुई गर्मी को कम करने वाली है तो यह स्वभाव में ठंडी होने के कारण जो इसके साथ हम गर्म औषधीय का भी प्रयोग करते हैं तो उनकी स्थिति को यह शुन्य बना देती है यानी कि उनको यह बहुत गर्म नहीं रहने देती है।

यह इसका पहला गुण हो जाता है दूसरी बात यह है कि यह धातु को पुष्ट करने में विशेष उपयोगी है यह स्टडीज में भी पाया गया है कि यह स्पर्म की मोटिलिटी को स्पर्म काउंट को स्पर्म वॉल्यूम को बढ़ाती है और काफी अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं।

जो नपुंसकता की स्थिति होती है पुरुषों में उसको भी यह समाप्त करने वाली होती है इसके विषय में यह भी पाया गया है कि 2 महीने तक अगर निरंतर उचित मात्रा में इसका प्रयोग किया जाए तो यह मांसपेशियों को मजबूत करने और मांसपेशियों को बढ़ाने में भी सहायता करती है साथ ही साथ समझे कि यह वात को और पित्त को कम करने वाली होती है और यह जो दोष है वात की स्थिति है।

पित्त की स्थिति है यही शरीर को दुर्बल करते हैं यही शरीर को कमजोर करते हैं पतला करते हैं तो जो औषधि पित्त को विशेष रूप से कम करती है वह बहुत ही उपयोगी रहने वाली है और सफेद मूसली पित को कम करेगी।

कोंच के बीज

अब कोंच के बीच जो है यह सबसे पहले तो आप समझ ले के पित्त को बढ़ाने वाले होते हैं सफेद मूसली को कम करते हैं लेकिन कोंच के बीज पित्त को बढ़ाते हैं दूसरी बात यह हुई कि यह गर्म होते हैं स्वभाव में यह गर्म है इनका अगर अधिक प्रयोग गर्मी के मौसम में किया जाएगा तो यह ठीक नहीं होगा इसलिए हमने कहा कि अनुपात को हमें बारीकी से समझना होगा लेकिन उनके गुण भी विशेष है पहला इनका जो गुण है वह है यह वात को कम करते हैं।

यानी वात दोष को यह कम करने वाले होते हैं दूसरी बात यह की धातु को पुष्ट करने में शरीर में बल को बढ़ाने में यह परम शक्तिशाली परम उपयोगी रहते हैं तीसरे स्थान पर समझे कि मानसिक समस्याओं में बहुत अच्छा काम करते हैं पार्किंसन जैसी समस्या को ठीक करने में ट्वीट करने में भी कोंच के बीज का प्रयोग किया जाता है।

कोंच के बीच में एल्डोपा नाम का अमीनो एसिड पाया जाता है जो की पार्किंसन की समस्या को ट्वीट करने में उपयोगी होता है कोंच के बीच में एंटी एजिंग प्रॉपर्टीज भी होती हैं जिससे कि यह आपका जो एजिंग इफेक्ट है उसको भी स्लो डाउन करता है आप लंबे समय तक बेहतर दिखते हैं अच्छे दिखते हैं लेकिन जैसे कि हमने शुरुआत में ही बताया कि यह पित्त को बढ़ाने वाला होता है स्वभाव में गर्म होता है इन दो बातों को याद रखें आगे हम इसी के अनुसार इसके अनुपात को आपको बताएंगे।

अश्वगंधा

अश्वगंधा के विषय में बहुत अधिक बताने की आवश्यकता नहीं है परम हितकारी है यह टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने वाली औषधि होती है यह शरीर में इन्फ्लेमेशन कहीं भी होती है दर्द होता है कहीं भी उसको भी कम करने वाली होती है कि मानसिक स्थितियों में बड़ा अच्छा कार्य करती है तनाव की स्थिति में एक एडेप्टोजन की तरह कार्य करती है।

अगर आप तनाव में है तो आपको वह स्थिति फिर परेशान नहीं करेगी आप उसको उतना अनुभव नहीं करेंगे इस तरीके की स्थिति में ले जाती है यह कोर्टिसोल हार्मोन को कम करती है जो की स्ट्रेस हार्मोन है और आपको विश्रांति अनुभव होती है और धीरे-धीरे आपको मानसिक समस्याओं में अच्छे लाभ मिलते हैं।

यह रिकवरी को बेहतर करती है यानी कि जो व्यक्ति जिम में जाते हैं जो व्यक्ति व्यायाम बहुत अधिक करते हैं फिजिकल जिनका कार्य अधिक रहता है उनकी रिकवरी को यह बेहतर करने वाली होती है अब इसकी प्रकृति को आप समझ ले यह वात और कफ का समन करती है लेकिन यह पित्त को बढ़ाने वाली होती है वात को कम करेगी कफ को कम करेगी लेकिन यह पित्त को बढ़ाएगी पहली बार दूसरी बात यह कि यह स्वभाव में गर्म ही होती है।

इन औषधियों को कितने अनुपात में लेना है और इसको अपने प्रयोग में लेने की विधि

आप देखें कि जो सबसे पहले हमारी औषधि है वह पित्त को कम करती है ठंडी होती है जो सफेद मूसली है, कोच के बीज भी स्वभाव में गर्म है, अश्वगंधा भी स्वभाव में गर्म है।

दोस्तों आपको इन औषधीय का अनुपात क्या रखना है जैसे कि आपने समझ लिया कि इनकी प्रकृति क्या है तो हमें अधिक मात्रा किस औषधि की रखनी होगी क्योंकि हम अब गर्मी में अगर उसका प्रयोग कर रहे हैं तो आपको अधिक मात्रा रखती है सफेद मूसली की अधिक मात्रा इसकी रखेंगे तो एक पित्त को भी काम करेगी और पित्त गर्मी के मौसम में बढ़ाना शुरू हो जाता है तो यह पित्त को कम करेगी और यह गर्मी को भी कम करेगी यानी कि कोच के बीज और अश्वगंधा में जो गर्मी है जो स्वभाव गर्म है उनका उष्ण है उसको यह कम करने वाली होगी।

तो अधिक मात्रा में हमने लिया सफेद मूसली को यहां पर और हमने कम मात्रा में लिया अश्वगंधा को और कोच के बीज को तो आपको करना यह है कि आपको इन तीनों ही औषधीय को चूर्ण या पावडर के रूप में लेकर के आना है क्योंकि कोच के बीज जो होते हैं उनको शुद्ध करके ही प्रयोग किया जाता है तो जो शुद्ध चूर्ण या पावडर मिलेगा बाजार में उसको आपको लेकर के आना है सफेद मूसली का भी चूर्ण लेकर के आना है और आपको अश्वगंधा का भी चूर्ण लेकर के आना है।

इस तरीके से तीन चूर्ण या पावडर प्राप्त हो जाते हैं पहले स्थान पर आपको जो सफेद मूसली लेनी है यह लेनी है 100 ग्राम की मात्रा में कोंच के बीच जो लेने हैं आपको 50 ग्राम की मात्रा में और आपको अश्वगंधा भी लेनी है 50 ग्राम की मात्रा में तो हमने 2 गुना यहां पर सफेद मूसली को रख लिया तीनों को एक स्थान पर ही मिल लेना है।

एक कांच के बोतल में स्टोर कर लेना है आपको और फिर इसमें से एक छोटा चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सोने से लगभग एक डेढ़ घंटा पहले हल्के गुनगुने दूध के साथ आपको इस चूर्ण को आपको प्रयोग कर लेना है इस तरीके से निरंतर आप उपयोग करते हैं तो यह आपके शरीर को पुष्ट कर देंगे और जो भी हमने पीछे लाभ बताए हैं।

उन सभी को आप प्राप्त करेंगे और आपके शरीर में गर्मी नहीं बढ़ेगी एक संतुलन बना रहेगा इन तीनों औषधीय का और इस विषय में ध्यान देना और सही तरीके से मौसम के अनुसार चीजों का प्रयोग करना बहुत ही उपयोगी हो जाता है इस तरीके से आप प्रयोग करें और इससे जो आपको लाभ मिलेंगे वह बहुत अच्छे होंगे बहुत सुंदर होंगे और कोई किसी प्रकार का दुष्प्रभाव आपको देखने को नहीं मिलेगा।

परामर्श

दोस्तों आप सभी इनको उपयोग तो करेंगे यह औषधिया शरीर के लिए नुकसान दायक नहीं है लेकिन आप इन औषधियों को लेने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेंना चाइयें ।

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